• Philosophy

    क्या भक्ति पत्थर को पूजना है? एक संवाद

    प्रचारक के पास मन में अनेक शंकाएँ लिए एक व्यक्ति आया। साधारण व्यक्ति: प्रभुजी, जब किसान श्रम करता है तो अन्न उत्पन्न होता है। इस के लिए कोइ ईश्वर से क्यों प्रार्थना करे? मूर्ती के सम्मुख फूल, फल, पूजा सामग्री द्वारा कोई क्यों भगवान से याचना करे? आखिर एक निर्जीव पत्थर से रचित मूर्ती में क्या क्षमता है। हमारी आवश्यक्ताओं की पुर्ती होती है हमारी शक्तियों से। यदि कोई श्रम न करे और दिनभर पूजा पाठ़ में लगा रहे, तो कोई पदार्थ उपलभ्ध न हो। प्रचारक: अापकी विचारधारा अत्यंत संकुचित है। आपने जीवन का गहराई से अनुसंधान नहीं किया न ही आचार्य से ज्ञान प्राप्त किया। इस कारण वश आपकी…