• Philosophy

    श्री कृष्ण की दिव्यता और हमारा परम् कर्तव्य

    श्री कृष्ण भगवत गीता में कहते हैं – जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्वतः । त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सो ऽर्जुन ॥भ० गी० ४.९ } हे अर्जुन! जो मेरे जन्म तथा कर्मों की दिव्य प्रकृति को जनता है, वह इस शरीर को छोड़ने पर इस भौतिक संसार में पुनः जन्म नहीं लेता, अपितु मेरे सनातन धाम को प्राप्त करता है। अर्थात पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान निष्क्रिय नहीं है। यदि कोई व्यक्ति भगवान के जन्म और  क्रियाओं को समझ लेगा तो वह आश्चर्य जनक परिणाम पाएगा। और वह क्या होगा? वह इस शरीर को छोड़ने के बाद दुबारा इस संसार में नहीं आयेगा। कुछ लोग इस श्लोक में वर्णित…