• Philosophy

    श्रद्धा

    जब एक व्यक्ति ट्रेन में सफर करने के लिए टिकट खरीदता है, तो वह आशवस्त होता है, कि यादि वह सही ट्रैन में बैठे तो अवश्य अपनी मंज़िल पर पहुँचेगा। उसे ट्रेन व्यवस्था पर संपूर्ण विश्वास होता है। इसी विश्वास को श्रद्धा कहा जाता है। ज्ञान के क्षेत्र में भी विद्यार्थी अध्यापक, तथा पुस्तकों को श्रद्धापूर्वक स्वीकार करते हैं। आध्यात्मिक जीवन में श्रद्धा आध्यात्मिक जीवन में विशेषकर, शिष्य का गुरू तथा शासत्र के प्रति अटूट श्रद्धा  होना अनिवार्य है। यदि कोई श्रील प्रभुपाद से श्रीमद् भगवद्गीता का ज्ञान श्रद्धापूर्वक सुनें तो उन्हे आभास होगा कि शरीर और मन आत्मा से भिन्न हैं तथा जब तक आत्मा की तृप्ती नहीं होति जीवन का…