• Philosophy

    कृष्ण का संरक्षण 

    क्या कभी किसी ने अकेले आनंद का अनुभव किया है? नहीं न? यह इसलिये है क्योंकि आनंद का अनुभव करने के लिए कम से कम दो लोगों की आवश्यकता  होती है। जब हम, अर्थात जीवात्मा, परमपुरुषोत्तम भगवान श्री कृषण की भक्तिपूर्वक सेवा करते हैं, तो हम उस पवित्र प्रेममय सेवा से उत्पन्न परमानंद की अनुभूती करते हैं। अब प्रश्न है कि हम अपने हृदय में परमात्मा स्वरूप विद्यमान श्री कृष्ण का अनुभव क्यों नहीं कर पाते? इसके लिये सबसे पहले हमें यह समझाना होगा कि हम उनके अंश हैं।  वास्तव में हमारा स्वरुप आनंदमय है। सभी ने कृष्ण की तस्वीर देखी होगी। वे कभी गोप गोपियों के मध्य, कभी गाँय…